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Thursday, May 21, 2015

 तुमने कहा था
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तुमने कहा था
अपने गगन से मुझे विस्तार दोगे
अपने झरोखे से गिराओगे
छाँव के बादल l
सूरज का एक दीप
मेरी चौखट पर सजाओगे
मै देखती हूँ
तुम्हारा गगन ,झरोखा और सूरज
उम्मीद करती हूँ
और निराश होती हूँ
कोई इस तरह भूलता है
कहीं अपने वादों को