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Monday, March 25, 2013

 ये चंचल रंग आपका हर पल रंगते जाएँ एक ऐसा इन्द्रधनुष आपके आँगन उतरे जो कभी ख़त्म न हो
होली की बहुत बहुत शुभकामनायें


फूल  खिले .वृक्ष सजे ,
चले मधुर बयार
मौसम ले आया  फागुन का उपहार

अबीर पहन पायल
छम छम डोले
गुलाल हौले से घूंघट  खोले
छा रहा कलियों में  प्यार का खुमार

गुझिया ठुमके ,
पापड़ छत पर सूखे
फिर भी गलियों में घर कई  भूखे
पेड़ की फुनगी पर उतरी है बहार

बादल  ने
लगाया धरती  को रंग
गुलाबी फिजा में घुली मानो  भंग
लजाई सरसों सूरज करे मनुहार


मदमस्त रंग उड़े
अपनी चाल  भूले
खुशबू पकने लगी  जल गये  चूल्हे
फगवा के आगे कौन गाये  मल्हार