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Monday, January 11, 2016

1
तुम गुलाब बन खिलना
मै कांटा बन
करूँगा रक्षा तुम्हारी
तुम्हे टूटने से बचा न सक तो
तोड़ने वाले के हाथ जख्मी तो कर दूंगा
2
गुलाब के ऊपर
गिरी शबनम
जानती है
सूख जाएगी धूप  में
पर फिर भी चली आती है
उसके मोह में

भगवान
मुझे गुलाब मत बनाना
मुझे   बनाना
रूप गंध विहीन
 छोटा सा फूल
क्यों की मुरझाने से पहले
 नहीं होना चाहता जुदा
मै अपनी डाली से

सुनो
अगले जन्म में
तुम गुलाब न बनना
कोई न कोई तोड़ ही लेगा
तुम कांटा भी न बनना
सभी बुरा कहेंगे तुम्हें
तुम गर्मी बन धरती पर उतारना
मै अनाज बन उगुंगा
छू कर तुम्हे
सुनहरा हो जाऊँगा
और बन जाऊँगा वरदान
किसी भूखे के लिए

6 comments:

shephali said...

सुन्दर रचना के लिए बधाई

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

सुन्दर रचना ।

आपके ब्लॉग को यहाँ शामिल किया गया है ।
ब्लॉग"दीप"

यहाँ भी पधारें-
तेजाब हमले के पीड़िता की व्यथा-
"कैसा तेरा प्यार था"

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

सुन्दर रचना ।

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तेजाब हमले के पीड़िता की व्यथा-
"कैसा तेरा प्यार था"

Whatsapp Awesome said...

Very Beautiful whatsapp awesome

Anonymous said...

aap sabhi ka bahut bahut dhnyavad
rachana

GathaEditor Onlinegatha said...

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