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Wednesday, June 8, 2011

सच जब  बोलना  चाहता है ,तो हजारों हाथ उसके पंख नोच धरा पर पटक देते  हैं l जो सच इस दर्द को सह नहीं पाता वो दम तोड़ देता है या फिर खुद को बिकता हुआ देखता रहता हैl


सच  

मै सच को खोजने निकली
देखा ,नोटों के नीचे दबा था
कहीं झूठ की चाकरी कर रहा था
तो कहीं ,
 टूटी झोपडी के कोने में
घायल पड़ा था
पूछा- ये कैसे हुआ ?
कहने लगा -
मैने बोलने की कोशिश की थी ।

73 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सदैव प्रासंगिक रहेंगें यह विचार...... सच का यही हाल है.....उम्दा रचना

रश्मि प्रभा... said...

chand lafz aur vistrit bhawnayen ... nihsandeh prashansniye

shikha varshney said...

बहुत सटीक ...सच को ऐसे ही दबा दिया जाता है.
प्रभावशाली पंक्तियाँ.

Sunil Kumar said...

क्या बात है बहुत अच्छी रचना, बधाई .....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मै सच को खोजने निकली
देखा ,नोटों के नीचे दबा था

सटीक बात ..सुन्दर अभिव्यक्ति

ZEAL said...

सत्य की कद्र करने वाले बहुत कम हैं , बहुत सुन्दर सृजन ।

Jyoti Mishra said...

the true depiction of people who dares to go with truth in today's world.

KAHI UNKAHI said...

बहुत अच्छी रचना है...। मेरी बधाई...।
प्रियंका गुप्ता

ज्योति सिंह said...

sach sundar hote huye bhi laachar kyo ?,mera bhi yahi sawaal hai .rachna taarife kabil hai .

श्यामल सुमन said...

कम शब्द और करारा चोट - बहुत खूब रचना जी.
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

राकेश कौशिक said...

बहुत कम शब्दों में आज के सच की दयनीय स्थिति को उजागर करती एक उच्च स्तरीय प्रस्तुति - करारा व्यंग - बहुत बहुत सुंदर

Harsh said...

bahut khoob. sundar abhivyakti

Bhushan said...

सच की सच्ची कहानी, छोटी-सी कविता की ज़बानी.

Vivek Jain said...

मै सच को खोजने निकली
देखा ,नोटों के नीचे दबा था
बहुत ही सटीक
साभार- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Babli said...

बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! प्रशंग्सनीय प्रस्तुती!

निर्मला कपिला said...

सच जब बोलना चाहता है ,तो हजारों हाथ उसके पंख नोच धरा पर पटक देते हैं l जो सच इस दर्द को सह नहीं पाता वो दम तोड़ देता है या फिर खुद को बिकता हुआ देखता रहता हैl
कितना सटीक सच है इन पँक्तिओं मे। और वाकई ये नोट कितने करामाती हैं कितना कुछ समा लेते हैं खुद मे और सच हम देख ही नही पाते। भावनात्मक सोच के लिये बधाई।

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

सच के साथ ये ही हुआ है

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' said...

बहुत सुन्दर

संजय भास्कर said...

टूटी झोपडी के कोने में
घायल पड़ा था
पूछा- ये कैसे हुआ ?
कहने लगा -
मैने बोलने की कोशिश की थी ।
सटीक बात.......सुन्दर अभिव्यक्ति

ajit gupta said...

छोटी सी रचना है लेकिन बहुत कुछ कह देती है।

Rachana said...

aap sabhi ka bahut bahuut dhnyavad .aap ka ek ek shbad mere liye moti hai.aur me nahi chahti ki mera koi bhi moti koye
punaha dhnyavad
rachana

Kunwar Kusumesh said...

वाह जी,क्या बात है .

अजय कुमार said...

सच की सच्ची तस्वीर

Kailash C Sharma said...

बहुत सटीक प्रस्तुति...कुछ शब्दों में बहुत कुछ कह दिया..

Dr Varsha Singh said...

सशक्त रचना ....हार्दिक शुभकामनायें !
एवं साधुवाद !

BrijmohanShrivastava said...

दिल तो बहुत करता है कि सच बोलें
क्या करें हौसला नहीं होता

सहज साहित्य said...

सच की दुर्गति का यथार्थ चित्रण आज के समाज की कलई खोल देता है ।

Dilbag Virk said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच

नूतन .. said...

टूटी झोपडी के कोने में
घायल पड़ा था
पूछा- ये कैसे हुआ ?
कहने लगा -
मैने बोलने की कोशिश की थी ।

वाह ..बहुत ही अच्‍छा लिखा है ।

Ravikar said...

प्रभावशाली पंक्तियाँ

neelima garg said...

thoughts provoking..

manu said...

bahut sunder lagi laghu-kavita

manu said...

bahut sunder lagi laghu-kavita......

amita kaundal said...

sahi kaha aapne rachna ji.
amita kaundal

singhSDM said...

Rachna ji
आईना दिखाया है आपने इस कविता में.... सच ही कहा है

मै सच को खोजने निकली
देखा ,नोटों के नीचे दबा था

manu shrivastav said...

दिल को छूने वाली कविता.
परन्तु, मेरा मानना है की सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं.
--------------------------------------------
क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है ?

बाबा का अनशन टुटा !

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/

अशोक कुमार शुक्ला said...

रचना जी ,
गागर में सागर जैसी आपकी इस रचना ने मुझे भी इस विषय पर कुछ लिखने की प्रेरणा दी है। सामग्री साहित्यशिल्पी पर प्रदर्शित है। कृपया अवसर निकालकर अनुगृहीत करे। आभारी रहूँगा।
भवदीय
अशोक कुमार शुक्ला

Kunwar Kusumesh said...

सच का यही हाल है.....उम्दा रचना

सदा said...

वाह ... बहुत खूब कहा है ।

mahendra srivastava said...

अद्भुत... बहुत सुंदर।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत सटीक
-----------------
कल 17/06/2011 को आपकी कोई पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है.
आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है .

धन्यवाद!
नयी-पुरानी हलचल

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत गहरी...बहुत मार्मिक कविता...
चंद शब्दों में रोजमर्रा के जीवन का सच व्यक्त कर दिया....बहुत खूब.

महफूज़ अली said...

दिस ईज़ फोर द फर्स्ट टाइम आई विजिटेड .. ऑन यौर ब्लॉग... ओवर ऑल ग्लैन्सड.... वेरी नाइज़ ब्लॉग....

थैंक्स फोर शेयरिंग....

रिगार्ड्स........

Udan Tashtari said...

एकदम सटीक!!!

Amrita Tanmay said...

Maine sach kaha to aapke coment box men ankit hua....achchha likha hai....

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत सुंदर पोस्ट रचना जी बधाई |

मुकेश कुमार तिवारी said...

रचना जी,

सच ने कुछ कहने की हिम्मत जुटा ली शायद यही उम्मीद की किरण है भले ही उसे कुचला गया हो लेकिन वह अपने पूरे स्वरूप में ही विद्यमान है।

सच के साथ हम भी हैं......

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

JHAROKHA said...

rachna ji
is chhoti si kavita me bahut hi kadva sach bhi chhupa hua haii jise aapne badi hi khoobsurati ke saath prastut kiya hai .
sach -----
bahut hi badhiya
badhai
poonam

Rachana said...

aap sabhi ka bahut bahut dhnyavad
meri kavita jivit kar dete hain aapke sneh shabad

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

अनामिका की सदायें ...... said...

gagar me saagar bhar diya. sateek lekhan.

Navin C. Chaturvedi said...

छोटी सी क्षणिका में बहुत बड़ी बात कह गए हैं आप

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/

Manish Kr. Khedawat said...

bahut hi umda rachna
sach ko yuhi daba diya jata hai :)
aapke chand alfazo ne bahut kuch keh diya
__________________________
मैं , मेरा बचपन और मेरी माँ || (^_^) ||

dipakkumar said...

bahut sundar yaha bhi aaye

dipakkumar said...

very nicy visit a my blog dil ki jubaan

mridula pradhan said...

कहने लगा -
मैने बोलने की कोशिश की थी ।
sachchayee ko ekdam khol kar rakh di aapne.achcha kiya....

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

विषय-वस्तु को पात्र बना कर रचना करना अत्यंत ही कठिन होता है और इससे भी कठिन होता है कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बात को कहना. दोनों ही विशिष्टताएं आपकी रचना में एक साथ परिलक्षित हैं.

रचना दीक्षित said...

गागर में सागर भर दिया है. सच का यही हालाते बयां है.

सतीश सक्सेना said...

वा वाह ...वा वाह ! ! शुभकामनायें आपको !

डॉ. हरदीप संधु said...

मै सच को खोजने निकली
देखा नोटों के नीचे दबा था

प्रभावशाली पंक्तियाँ !

Sachin Malhotra said...

सच में ही सच लिख दिया आपने तो ! :) बहुत ही बढ़िया !

मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

amrendra "amar" said...

सच का यही हाल है....प्रभावशाली, बहुत अच्छी रचना, बधाई *****

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" said...

great!!!

zabardast kataaksh....

uchch star ki behtareen saathak rachna....

kam shabd lekin bade shabd!!

veerubhai said...

बहुत सुन्दर !

संजय कुमार चौरसिया said...

सच का यही हाल है.....उम्दा रचना

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

रचना जी


मैने बोलने की कोशिश की थी बहुत हृदयस्पर्शी रचना है …
सच की आजकल यही हालत है …

…लेकिन कभी तो बदलेगी स्थिति , उम्मीद पर ही चल रही है दुनिया !
श्रेष्ठ लघु रचना के लिए आभार !

हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

veerubhai said...

एक सच यह भी है "कलावती के हिस्से का खाना भारत के भावी प्रधान मंत्री टूंग आतें हैं .".

Babli said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
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ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') said...

गागर में सागर सरीखी हैं आपकी रचनाएं।


रचना जी, यह देख कर अच्‍छा लगा कि आप लखनऊ से ताल्‍लुक रखती हैं। आपसे एक आग्रह है कि ब्‍लॉग में कृपया फॉलोअर विजेट जोड़ लें, जिससे आपको नियमित रूप से पढने में सहुलियत हो।

manukavya said...

मै सच को खोजने निकली
देखा ,नोटों के नीचे दबा था
कहीं झूठ की चाकरी कर रहा था
तो कहीं ,
टूटी झोपडी के कोने में
घायल पड़ा था

एकदम सही कहा आपने, आज सच की ऐसी ही दयनीय स्थिति है .

Dr.Bhawna said...

Ekdam sahi kaha aapne ...